आत्मा के लिए पाप-पुण्य स्वीकार करना पड़ता है : दिनेश मुनि

संस,लुधियाना:एसएसजैनस्थानकसिविललाइंसकेमहावीरभवनमेंचलरहीधर्मसभामेंसामूहिकप्रवचनकरतेहुएजैनसंतप्रवर्तकडा.राजेंद्रमुनि,सलाहकारदिनेशमुनि,साहित्यदिवाकरसुरेंद्रमुनि,डा.दीपेंद्रमुनि,डा.पुष्पेंद्रमुनिनेभारतीयदर्शनोंकोआस्तिकदर्शनबतलातेहुएकहाकिजहांकीसमस्तधर्मपरंपरामेंआत्मतत्वकोस्वीकारकियागया।अत:इन्हेंआस्तिकदर्शनअर्थातजोमनसावाचाकर्मणआत्मकोस्वीकारकरताहै।अस्तिश्रद्धाआत्मयस्यस:आत्माजिसेआत्मापरविश्वासहैवोआतीकएवंइसकेविपरीतजिसेआत्मापरविश्वासनहोवोनास्तिककहलाताहै।साम्यवादविचारधाराकोलेकरजहांकीभूमिमेंचावकिदर्शनकाउदयहुआजोआत्माकेआस्तित्वकोस्वीकारनहींकरताहै।कितुजोआत्माकोनहींमानता।वहभीआत्माकोगहराईमेंमान्यतादेताहीहै।तभीइसेनकारतारहताहै।इसकेपीछेभीगहरीभयकीभावनाअनुशासनकीभावनारहीहैक्योंकिआत्माकोस्वीकारकरनेसेपुण्यपापपरलोक,धर्मअधर्मसभीतत्वोंकोस्वीकारनापड़ताहै।सभामेंप्रारंभमेंसामूहिकनवकारमहामंत्रवघंटाकर्णस्त्रोतकापाठकियागया।

एवंवैरागीजैनमजैनकीतिलकरस्मकीविधिसंपन्नकरतेहुएकेटीकाकीसेवाअनिलजैन,मधुजैन,नंदन,नेहाजैनकिडलेपरिवारद्वारासंपन्नकियागया।इसअवसरपरअध्यक्षअरिदमनजैन,सुभाषजैन,रविदरजैनभ्राता,फूलचंदजैन,मुकेशजैन,विजयजैन,नीलमजैन,नविताजैन,नीरुजैन,आदिसमाजकेप्रमुखजनशामिलरहेएवंस्वागतसत्कारकेसाथअल्पाहरकाकार्यक्रमसंपन्नकियागया।