पुण्य, परोपकार व जीव दया का सदुपयोग जरूरी : साध्वी रत्न संचिता

संस,लुधियाना:तपचंद्रिकाश्रमणीगौरवमहासाध्वीवीणामहाराज,नवकारआराधिकामहासाध्वीसुनैयाम.,प्रवचनभास्करकोकिलाकंठीसाध्वीरत्नसंचितामहाराज,विद्याभिलाषीअरणवीम.,नवदीक्षितासाध्वीअर्शिया,नवदीक्षिताआर्यनंदठाणा-6नेजैनस्थानकशिवपुरीमेंसुखसाताविराजमानहुएहै।इसअवसरचलरहीधर्मसभामेंसंचितामहाराजनेकहाकिआजकेइसभौतिकयुगमेंमानवभौतिकपदार्थोंकेप्रतिअत्यधिकआसक्तहोताचलाजारहाहै।बनावटीजीवनमेंमशगूलबनकरअशांतिकोआमंत्रितकररहाहै।धनसेमात्रसाधनकीउपलब्धतातोसंभवहै,लेकिनबाहरीसुखसुविधादुखकाकारणबनरहीहै।हमइसमहामारीकोरोनाकेयुगमेंजीरहेहै।आवश्यकताहैइनसाधनोंकोकमकरनेकाप्रयासकरमानसिकशांतिकेलिएआत्मभावमेंविचरणकरे।तप,जपसाधनास्वाध्यायमेंपुण्यपरोपकारजीवदयामेंप्राप्तनमनधनकासदुपयोगकरतेरहें।तभीमनकीशांतिसंभवहै।महासाध्वीवीणामहाराजनेअपनेसंदेशमेंकहाकिकर्मकरतेरहे,फलकीइच्छामतकरे,वहहीसच्चीमानवताहै।उन्होंनेकहाकिकभीकभीअपनेअंदरकीसफाईभीकरो।घर,शरीर,शहरसबसाफसुथराचाहतेहै,तभीतोसरकारभीनारादेरहीहै।किस्वच्छभारत।आजबाहरकीसफाईपरतोहमाराध्यानहै,परजबतकभीतरकीसफाईनहींहोगी,तबतकशांतिकीप्राप्तिनहींहोसकती।इसअवसरपरएसएसजैनसभाध्यक्षविनीतजैन,पुष्पलालजैन,महामंत्रीराजीवजैन,कोषाध्यक्षकुलदीपजैन,सतीशजैनपब्बी,दिनेशजैन,वैभवजैनआदिसदस्यगणशामिलथे।