सत्संग के बिना इंसान पशु समान : स्वामी निगम बोध

संस,लुधियाना:भारतधर्मप्रचारकमंडलकीओरसेवेदाचार्यस्वामीनिगमबोधतीर्थकेसानिध्यमेंसत्संगसभाकाआयोजनकियागया।इसअवसरपरआयोजितसभामेंस्वामीनिगमबोधतीर्थमहाराजनेअपनेसंदेशमेंकहाकिबिनासत्संगकेमानवपशुकेबराबरहै।लेकिनइंसानसोचताहैकिअगरसतसंगिमेंहीअपनासमयबर्बादकरदियातोघरकागुजाराकैसेहोगा?ऐसेलोगोंकीसोचकोदेखकरहमारेमहापुरूषकहतेहैंकिजीवतुझेचिताकरनेकीजरूरतनहींहै।क्योंकिअगरआपकेपाससांसारिकधनदौलतहैतोवहअपनीसंतानकोदेदो।अगरपासनहींहैतोकोईबातनही।अपनेबच्चोंकेअच्छेसंस्कारदो।

इसअवसरपरस्वामीदेवेश्वानंदतीर्थमहाराजनेकहाकिउसगुरूकेचरणोंमेंमेरीवंदनाहैजोसबकुछकरनेमेंसमर्थहै।जोइंसानकेरूपमेंपरमात्माहै।जिसकेवचनअज्ञानतारूपीअंधेरेकोखत्मकरनेकेलिएसूर्यकेसमानहै।सत्संगविचारभीऐसेहीहुआकरतेहैंजिनकोजाननेसेहमारेमनमेंभीऐसेसंस्कारपैदाहोतेहैंजोहमेंआत्मिकशांतिप्रदानकरसकतेहैं,क्योंकिइंसानजैसेविचारसुनताहैजैसासंगकरताहै,वैसेहीकर्मकरताहै।गोस्वामीतुलसीदासबहुतअच्छाउदाहरणदेतेहुएसमझातेहैंकिएकधूलकाकणहवाकासंगकरनेसेआकाशकीऊंचाइयोंकोभीछूसकताहैऔरकीचड़मेंमिलकरकीचड़भीहोसकताहै।यहसबसंगतकेकारणहीहोताहै।